वट पूर्णिमा का महत्व
वट पूर्णिमा (Vat Purnima) हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा को मनाती हैं। यह व्रत मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत में मनाया जाता है। 🌟 वट पूर्णिमा का महत्वयह पर्व महाभारत की प्रसिद्ध पौराणिक कथा सावित्री और सत्यवान पर आधारित है। कथा के अनुसार, देवी सावित्री ने अपनी अटूट भक्ति और बुद्धिमत्ता से यमराज (मृत्यु के देवता) को अपने मृत पति सत्यवान के प्राण वापस लौटाने पर विवश कर दिया था। तब से ही महिलाएं इस व्रत को रखकर देवी सावित्री के त्याग और पतिव्रता धर्म का सम्मान करती हैं। 🌳 पूजा विधिवट वृक्ष की पूजा: इस दिन बरगद (वट) के पेड़ की पूजा का विशेष विधान है। माना जाता है कि बरगद के पेड़ में त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) का वास होता है।तैयारी: महिलाएं सुबह स्नान करके सोलह श्रृंगार करती हैं और निर्जला या फलाहारी व्रत रखती हैं।परिक्रमा: पेड़ की जड़ में जल और कच्चा दूध अर्पित किया जाता है। इसके बाद तने पर सूती या लाल मौली (धागा) लपेटकर 5 या 7 बार परिक्रमा (प्रदक्षिणा) की जाती है।कथा सुनना: परिक्रमा पूरी करने के बाद वट सावित्री की व्रत कथा सुनी जाती है और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।